कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं आपके सामने आ जाती है , जिनके बारे में आप नहीं सोचेंगे तो आपको बुरा महसूस होने लगेगा जबकि आप उसके लिए कुछ भी नहीं कर सकते हो। जैसे आज की ही समाचार की पहली न्यूज़ पहलगाम में हुई आतंकी घटना , कैसे कुछ निर्दयी आतंकियों ने बेक़सूर लोगों को मौत के घाट उतार दिया , और कुछ को जिन्दा छोड़ा तो क्यों छोड़ा , वो पत्नियां जो खुद मौत की भीख मांग रही थी तो उन्हें छोड़ दिया , क्या सोच के लोग वहां आये थे और क्या हो गया उनके साथ।
इस घटना ने आज पूरा दिन मुझे ये सोचने पर मजबूर किया कि ये घटनाएं कब तक होती रहेंगी ? बात तो ये है ये हो क्यों रही है और इससे किसी को क्या मिल रहा है।
ये किस तरह का बदला लोग एक दूसरे से ले रहे हैं जो कभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है, और निर्दोष अपनी जान गवा रहे है। ये आतंकियों ने इस घटना को अंजाम दिया,उसके बाद क्या हमारी सरकार उसके लिए कदम उठाएगी उनकी आतंकियों को ढेर कर करेगी पर क्या ये कार्यवाही उन लोगों का दर्द कर कम कर पाएगी क्या, उस असहनीय पीड़ा को समझ पाएगी , ये सब करने से उन पत्नियों के पति वापिस आ पाएंगे क्या? नहीं होता कभी कुछ भी नहीं है।
आज ये हुआ है, कल किसी और तरीके से कुछ और लोग इसी घटनाओं को अंजाम देंगे, फिर कुछ बेगुनाह मारे जाएंगे और बस अभी तक जैसे सिलसिला चल आ रहा था वो आगे भी चलता रहेगा ।
कम से कम आप अपने परिवार के साथ हैं स्वस्थ हैं और मन में ये विचार फिलहाल के लिए नहीं आते हैं की कोई भी कही भी हम पर यूँही गोली चला देगा।
कल तक मैं इसी विषय में अपनी क्लास की कुछ छात्रों से पूछ रही थी की मुझे किस विषय के बारे में लिखना चाहिए उन विषयों के बारे जिसमे हर कोई बात कर रहा आतंकवाद , कतल , जाती , धर्म ,समानता असमानता , बेरोजगारी, आये दिन होने वाले नयी नयी घटनाएं, और अगर मैं इनके बारे में ज्यादा बात नहीं करू तो मैं जागरूक व्यक्ति नहीं हूं , और मुझे समाज में होने वाली घटनाओं से फर्क नहीं पड़ता है।
मुझे इसके लिए बुरा लगना जरुरी है क्या ? और इन सब के बारे में लिखूं भी तो क्या ? और ऐसा अलग क्या ही लिख दूंगी जो किसी और ने नहीं लिखा होगा , और इसे पढ़कर किसी को दया , करुणा, पीड़ा, कुछ देर तक महसूस होगी या फिर पूरा दिन आपका उन्ही ख्याल में गुजर जायेगा और आप कुछ नहीं कर सकते उनके लिए , उनकी पीड़ा नहीं समझ सकते हो खुद को उनकी जगह पर भी नहीं रख सकते हो ये सोच के ही आपकी रूह कांप सकती जो आधी कांप भी गयी है न्यूज़ पढ़ के।
या फिर उन मुद्दों की बात करूँ जिससे हर व्यक्ति हर दिन गुजरता है , जिससे उसको ख़ुशी भी मिलती है , चिंता भी होती है, पर भी वो उनका समाधान निकाल सकता है, उसका निवारण करके उस चिंता को दूर कर सकता है।
आम जीवन के साधारण मुद्दे जिनके बारे में बात करने के लिए कोई समय ही नहीं निकलता है, जो ज्यादा महत्वपूर्ण है, घर परिवार में होने वाली समस्याएं, जैसे हाल के माहौल का कहूं तो सबसे पहले बच्चे को किस विद्यालय में पढ़ाना है, युवावस्था की सीढ़ी चढ़ने पर किस कॉलेज जाएं, कौन सा विषय चुने, अभी तो ये हाल है पहले बोर्ड की तैयारी फिर अन्य परीक्षाओं की तैयारी जहां आपके बोर्ड के नम्बर मायने रखती है, कॉलेज मिल जाने के बाद दोस्ती यारी , प्यार , मुहब्बत के किस्से, घूमने फिरना और इन सबके के बीच पढ़ाई पे ध्यान देना, फिर नौकरी की खोज, ओर जब तक वो न मिले तब तक घरवालों के ताने, उसका दबाव सहना, फिर शादी की समस्या, कोई शादी नहीं करना चाह रहा, किसी की शादी नहीं हो रही, घरवालों को अलग चिंता होती है वो अलग, शादी हो जाए तो फिर बच्चों की टेंशन, कोई पति से परेशान कोई पत्नी से, कोई सास ससुर से, कोई बच्चों से , कोई आए दिन बढ़ने वाली महंगाई से, ऐसे न जाने कितनी ही मुद्दे हैं जो हर किसी के लिए हैं और विशेष भी हैं, इसने भाग नहीं सकते हैं और सामना करना ही पड़ेगा लेकिन अगर इनके बारे में कोई लिखे तो सामने वाला इससे खुद को जोड़ेगा जरूर और अपनी परेशानी पे बात करते देख उसे शायद थोड़ा सुकून तो मिले, और समाधान भी।
तो किन मुद्दों पे ज्यादा बात की जानी चाहिए जिनसे राहत मिले या जिनसे मन विचलित हो उठे। मुद्दा कोई छोटा नहीं है न समाज में होने वाली अनहोनियों का , न साधारण जीवन में होने वाली घटनाओं का, अच्छा हो या बुरा ।
लेकिन वे आम है और उसी से जीवन के होने का ओर उसे जीने का अहसास होता है। कम से कम आप आजाद तो हैं, आप डर के साए में तो नहीं है।
