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वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर एक नजर….

नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के पारित होने के बाद कई राजनीतिक दलों, एनजीओ और लोगों ने इसे चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से इसके कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों पर रोक लगाने के साथ इस कानूनी लड़ाई ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि कानून के लागू…

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मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट शुरू, सीएम से विधायकों की भेंट का सिलसिला शुरू……

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में विधायक श्री सहदेव पुंडीर, श्री खजान दास, श्री सुरेश चौहान, श्री भरत चौधरी, श्री संजय डोभाल, श्री अनिल नौटियाल, श्री प्रीतम पंवार एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने शिष्टाचार भेंट की। शिष्टाचार भेंट के दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की विभिन्न विकासपरक मांगों एवं स्थानीय समस्याओं…

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मेरा शहर, छोटा सा शहर, नई टिहरी

कैसे होते हैं ये छोटे शहर, कैसी होती है इनकी दुनिया, कैसे होते हैं यहां के लोग, क्या खाते हैं क्या पीते हैं और कैसे रहते है? छोटे शहर वो होते हैं जहां दुनियाभर का शोर नहीं होता , न दौड़कर आगे जाने की चाह होती है और न किसी को पीछे खींचने की होड़।…

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आत्मसंतुष्टि, सब पर नियंत्रण करने की चाह।

तो आज की मेरी चर्चा का विषय है दूसरों को अपने अनुसार ढालने की चाह। कब तक हम यूं ही अपनी संतुष्टि के लिए, खुद को झूठा दिलासा देने के लिए दूसरों को बांधे रखेंगे , अपने अनुसार किसी को ढालने की कोशिश करेंगे, और इतना सब करके कोई कितना आपसे दिल से जुड़ा रहेगा,…

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प्रेम, प्रेम कहानी, एक खास किस्सा

हर कोई कभी ना कभी अपनी जिंदगी में एक प्रेम कहानी के योग्य होता है। हर किसी की कोई ना कोई प्रेम कहानी तो जरूर होनी चाहिए, कोई ऐसा किस्सा तो होना ही चाहिए जिंदगी का ,जिसे सुनाते हुए आपका चेहरा गुलाब की तरह गुलाबी हो जाए, आपको वो एहसास फिर से महसूस हो जाए,…

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जीवन ,उससे जुड़े लोग, और उनसे जुड़ी अपेक्षाएं

आज कल हम सब कैसे हो गए हैं, कभी सोचा है क्या? हर कोई अपनी सहुलियत के लिए हर किसी में बदलाव करने पर तुला है। हमें हर वो बात, हरकत सही लगती जो हमारे नजरिए में सही है पर क्या हमारा वो नजरिया सही है ? प्रश्न विवादास्पद है। तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए…

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लिखना जरूरी होता है

लिखना जरूरी होता है, कितना मानते है लोग इसको। क्या महसूस करते हो आप सभी जब भी आप कुछ लिखते हो, मन में उभर रहे भावों को, आपके चिंतन के समय दखल दे रही अनकहे कथनों को, जिन्हें किसी के सामने परोसने के लिए , सरलता से ,सही शब्दों के साथ कहने के लिए आपको…

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अपेक्षाओं से घिरते जा रहे हम

कितनी बार ऐसा होता है की एक समय पे आप बिलकुल निश्चिंत रहते हैं की आपको क्या करना है , आने वाले समय में क्या क्या हो सकता है ऐसा नहीं होगा तो वैसा होगा पर कुछ न कुछ तो हो ही जायेगा ,और कुछ न कुछ होने के बड़े मोके है, जो आपको विश्वास…

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समाज में हम, और हमारे मुद्दों से जुड़ा समाज

कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं आपके सामने आ जाती है , जिनके बारे में आप नहीं सोचेंगे तो आपको बुरा महसूस होने लगेगा जबकि आप उसके लिए कुछ भी नहीं कर सकते हो। जैसे आज की ही समाचार की पहली न्यूज़ पहलगाम में हुई आतंकी घटना , कैसे कुछ निर्दयी आतंकियों ने बेक़सूर लोगों को…

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क्या लालच इतनी बुरी बला है ?

लालच एक बुरी बला है ये तो सबने ही सुना ही होगा ,और सबको बताया भी होगा। मैं तो कहती हूँ समझदारी से सोच समझके बेवकूफी करना और सब बर्बाद कर देना भी लालच की एक परिभाषा है। और उस समय आप हर खतरा लेने को तैयार रहते हैं और कहीं न कहीं ये भी…

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